Saturday, March 8, 2014

मेरी कल्पना के पन्नों से......

मेरी कल्पना के पन्नों से......

आज मेरी डायरी के हर राज खुलेंगे 
हर पन्ने के लफ्ज, दिल की बात कहेंगे सर्द दुपहरी में कांपते कदम बढ़े तेरी और 
पाया बुखार में तड़पता अलाव तापता 
मेरी नजरों ने देखा कि लकड़ी खत्म होने को हैं 
तेरी नज़रों ने देखा कि मेरे हाथ में एक डायरी हैं 
डायरी का पन्ना - पन्ना स्वाहा हो गया 
कुछ इस तरह इश्क़ मेरा बयां हो गया।

दिल से ..... डिम्पल

2 टिप्पणियाँ:

...Maitreya Manoj said...

heart touching....

...Maitreya Manoj said...

just small correction: in context of my two comments today, replace first on second and second on first. that is how, i really wanna to post