Monday, April 26, 2010

बदलाव


परिवर्तन जीवन का नियम हैं..इस तथ्य से कोई भी अपरिचित नहीं हैं......बदलाव निश्चित हैं....फिर चाहे वो कहीं भी और कैसे भी किसी भी रूप में हो.......हमे बदलाव को स्वीकार करना और उसे अपनाना आना चाहिए...नहीं तो हम पीछे रह जायेंगे......जो बदल नही सकता....झुक नहीं सकता.....वो धारा के साथ नहीं बह सकता....हमे तो धाराप्रवाह बहाना हैं ...कदम से कदम मिलाकर....तो थोडा लचीला तो होना पड़ेगा....प्रकृति भी बदलाव पसंद करती हैं.ये बात अलग हैं कि कुछ बदलाव हमने उस पर जबरदस्ती थोपे हैं जिसकी एक जबरदस्त कीमत एक दिन हमें ही चुकानी हैं....फिलहाल थोड़ी बहुत तो चुका ही रहें हैं...पर ये तो ब्याज हैं.....असल तो अब पता चलेगा....खैर बदलाव पर कुछ शब्दों का ताना बाना....





चाहे तारे चमके
चाहे चंदा चहके
चाहे हो घना अंधकार
होके रहेगा होनहार
काली रात के बाद उजली प्रभा तो आनी ही हैं
चाहे बादल गरजे
चाहे किसान तरसे
चाहे बिजली करे प्रहार
होके रहेगा होनहार
इन काली घटाओं के बाद बरखा तो होनी ही हैं
चाहे हो खाली हंसी के प्याले
चाहे खाने को पड़ते हो लाले
चाहे आँखों में अश्रुधार
होके रहेगा होनहार
दुःख कि काली छाया के बाद सुख तो आना ही हैं
चाहे बुराई रावण समान
राम आएगा धर के कमान
चाहे अधम बड़ा ताकतवर
होके रहेगा होनहार
बुराई पर अच्छाई कि जीत तो होनी ही हैं|

65 टिप्पणियाँ:

देवेश प्रताप said...

बेहतरीन प्रस्तुती ........जिंदगी का यही जीवन चक्र है .

dipayan said...

बहुत सुन्दर, प्रेरक रचना । अन्धेरे के बाद, उजाला होना ही है । बधाई स्वीकारे ।

अरुणेश मिश्र said...

चिर सत्य निरूपित है कविता मे । यश और उपलब्धि की ओर अग्रसर ।

हर्षिता said...

सुन्दर एवं प्रेरक रचना है।

kavisurendradube said...

good very good

Vishal Kashyap said...

जय श्री कृष्ण .......
काफी सुन्दर रचना पर विशेष बधाई .....

kunwarji's said...

"होके रहेगा होनहार"
सुन्दर भाव-अभिवयक्ति और प्रकृति में विश्वाश दर्शाती आपकी ये कविता!

बहुत बढ़िया!

कुंवर जी,

राकेश कौशिक said...

"बुराई पर अच्छाई कि जीत तो होनी ही हैं"
निश्चित - सोलह आने सच - सुंदर रचना

pankaj said...

good job

pankaj said...

achha likha hain.....

दीनदयाल शर्मा said...

आपकी कविता बहुत ही अच्छी बनी है...बधाई...इसमें....चाहे अधम बड़ा ताकतवर ...लिखा है...इस ताकतवर शब्द में एक मात्र कम है...मात्रा का ध्यान बहुत ही जरुरी है... http://taabartoli.blogspot.com is blog par Pls. apni tippni jarur dena..I will wait...Thanks. Deendayal sharma

Antriksh Kewlaiya said...

बहुत अच्छी और सही बात लिखी है तुमने....

सुन्दर और बेहतरीन रचना ...

Shekhar Suman said...

bahut hi achhi kavita...
aapke blog par comment karne mein kuch problem ho rahi hai....

दिगम्बर नासवा said...

बुराई पर अच्छाई की जीत होनी ही है ... ये सच है पर कभी कभी बहुत देर हो जाती है इसमें और आस्था दम तोड़ देती है ...

usha rai said...

काली रात के बाद उजली प्रभा तो आनी ही हैं!!!
ये गजब का आत्म विश्वास कविता में अच्छा लगा ! आपको जानने के बाद और भी ! पक्की दोस्ती बधाई के साथ !

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

डिम्पल जी....प्रस्तावना और कविता पढ़कर दिल गदगद हो गया.
ये आपके गहन अध्ययन और समझ का प्रमाण है. आप साहित्य क्षेत्र में खूब नाम कमायें, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ.

gajainder singh yadav said...

aap apni umar se adhik budhiman hai aapka blog dekhkar achcha laga ......kripya meri madd kare mere blog ko sajane me ...thanx

gajainder singh yadav said...

dimpal ji aapke bare me adhik jankari ke liye key bord ke batan daba raha tha. galti se follower bloked ka option dab gaya mujhe maaf kare ab usko thik karen ka kya tarika hai plz bataye mera sobhagy tha aap mere blog ke folower bane. or mera durbhagy hai ki adhik jankari nahi hone ke karan aisa huaa..........

gajainder singh yadav said...

yadi kuch batana ho to kripya mere mail id par bata sakti hai.........gajainder.bjp@gmail.com

Shri"helping nature" said...

चाहे बुराई रावण समान
राम आएगा धर के कमान
चाहे अधम बड़ा ताकतवर
होके रहेगा होनहार
sundar rachna ek positive thought k saath .
aapki is sundr rachna k liye dhanywad .hum aapki kavitaon ka intjaar krte hai
pranam

Babli said...

बेहद सुन्दर, प्रेरक और भावपूर्ण रचना!

भूतनाथ said...

haan.....dimpel......sach.....

रोहित said...

burai pe acchai ki jeet,adharm per dharm ka jay prakriti ka naisargik uphaar hai..
aapki rachna isi dharna ko aur majbuti pradan karti hai!
behatareen lekhan.
regards-
#ROHIT

Dr. shyam gupta said...

बहुत खूब कहा, डिम्पल----

होके रहेगा होनहार
बुराई पर अच्छाई कि जीत तो होनी ही हैं|

आशीष/ ASHISH said...

Zindagi kee yahi reet hai.....
Haar ke baad hi jeet hai!
Sadhuwad!

rohit said...

डिम्पल की ये कृति भी उसकी सामाजिक संवेदनशीलता को दर्शाती है... एक और अच्छा प्रयास.....शुभकामना...कभी लिखा बंद मत करना.

kalpna said...

बहुत खूब डिपू...बहुत अच्छा लिखती हैं....अब में भी ब्लॉग पे हूँ....में भी लिखूंगी....

kalpna said...

very well written...take care

अजनबी said...

achha likha hain.....keep it up sis......

हरकीरत ' हीर' said...

बहुत सुंदर रचना श्रुति जी ...
बहुत बढिया लिखती हैं आप ....
सकारात्मक सोच की प्रभावपूर्ण रचना .....!!

pjaware said...

nice thoughts,will be glad to follow u and i m highly thankful to u for visiting and commenting on my blog

अंकुर द्विवेदी said...

डिम्पल जी आप बहुत ही अच्छा लिखती है । आपके द्वारा बदलाव शीर्षक पर जो पद्य लिखा गया है , वह अत्यंत ही प्रेरणा दायक होने के साथ ही जीवन का सच भी है । मेरी रचना पर आपके कमेन्ट के लिए कोटि-कोटि धन्यवाद!

nilesh mathur said...

डिम्पल जी, आपकी कई रचनाए आज पढ़ी, खास तौर पर 'कोख में आतंकवाद' बहुत ही मर्मस्परसी रचना है, मैं अब तक आपके ब्लॉग से दूर रहा इसका अफ़सोस है ! about me में 'में' की जगह 'मै' करें !

mridula pradhan said...

bahut hi achchi rachna hai.

SABD Just Adorable said...

wow
wow
wow
aur kuch sabd nahi ha mere paas

रचना दीक्षित said...

बहुत जबरदस्त अभिव्यक्ति बड़ी सकारात्मक बात
आभार

Rajat Ghildiyal said...

"चाहे बादल गरजे
चाहे किसान तरसे"
मात्र ८ शब्दों में सच का प्रभाव झलकता है ....
आपकी लेखनी प्रभावपूर्ण है ...


"प्रकृति भी बदलाव पसंद करती हैं.ये बात अलग हैं कि कुछ बदलाव हमने उस पर जबरदस्ती थोपे हैं"

पंक्तियाँ मुझे सबसे अधिक वजनदार लगीं .

abhay said...

aise kuch log hi hote hain jo jeevan ka sach jaane ki kosis karte hain aue samjhne ki kosis karte hain aap unme se hi ek ho
kavita padh kar laga ki hum to is soch ke mamle main aapke samne kahin bhi nahi hain
bahut sundar kavita
dil se
www.jeevankidastan.blogspot.com par humne bhi kuch kavita likhne ki kosis ki hain
krapya unpe bhi prakash daalna aur batana ke kahan par galat hain abhi hum kya sudhar aur karna chahiye
dhanybaad

Shekhar Suman said...

-------------------------------------
mere blog par is baar
तुम कहाँ हो ? ? ?
jaroor aayein...
tippani ka intzaar rahega...
http://i555.blogspot.com/

naarii said...

जय श्री कृष्ण ......बहुत ख़ूबसूरत रचना लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! लाजवाब प्रस्तुती.
काफी सुन्दर रचना पर विशेष बधाई ..... अभिव्यक्ति बहुत खूब.

naarii said...

चाहे हो खाली हंसी के प्याले
चाहे खाने को पड़ते हो लाले
चाहे आँखों में अश्रुधार
होके रहेगा होनहार
सारी रचनाये आपकी बहुत ही अच्छी है/
जितना भी कहू बहुत कम है|

बेचैन आत्मा said...

बुराई पर अच्छाई कि जीत तो होनी ही हैं.

...सरल शब्दों में जीवन चक्र की सफल अभिव्यक्ति के लिए बधाई।

Rakesh said...

दुःख कि काली छाया के बाद सुख तो आना ही हैं
चाहे बुराई रावण समान
राम आएगा धर के कमान
चाहे अधम बड़ा ताकतवर
होके रहेगा होनहार
wah
aapki aasha ne sahaj hi sanchaar kiya hai viswas kaa
bhasha sanyat v sahaj hai ....achaa laga aapko padhna

राजेन्द्र मीणा said...

सुन्दर प्रस्तुति ..बधाई स्वीकारे
http://athaah.blogspot.com/

सुलभ § सतरंगी said...

जैसा की मैंने पहले भी कहा है, आप सरल शब्दों में सीधे सीधे दिल से कह देती हैं. यही आपकी विशेषता है.

प्रस्तावना सहित सभी पंक्तिया भली लगी.

-सुलभ

nikita said...

bahut sundar rachana hai....!

-nikita

http://love-you-mom.blogspot.com

rohit said...

Girl is intelligent in literal sense......

राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ said...

"में",यह में हो तो सारे फसाद की जड़ हैं और ताज्जुब
की बात देखिये की हम शुरुआत ही"मे" से करते हैं
में एक..आपकी इस बात में ही डिम्पल जी सारा
रहस्य छुपा हुआ है..इसमें थोङा और जोङ दिया
जाय तो वो ये होगा कि ये "मैं " मिथ्या अर्थात जूठा
है इसी से मनुष्य कर्ता और भोक्ता है..श्रीकृष्ण इसी
को हटाकर अकर्ता होने की सलाह देते है ..और तब
यही मुक्ति मार्ग बन जाता है...आपके विचारों से
बेहद खुशी हुयी .धन्यबाद

राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ said...

एक बेहतरीन रचना
काबिले तारीफ़
सुन्दर भावाव्यक्ति .साधुवाद
satguru-satykikhoj.blogspot.com

RAJ SINH said...

उम्मीद की बयानी
दिल की जुबानी !

इस में आशाओं के बादलों की वह नमी है जो बौछार देगी मन को .

अजनबी said...

अभी रात कुछ है बाकी न उठा नकाब साकी
तेरा रिंद गिरते गिरते कहीं फिर संभाल न जाये

मेरी ज़िंदगी के मालिक मेरे दिल पे हाँथ रखना
तेरे आने की खुशी में मेरा दम निकाल न जाये

Rocking rathi said...

जीत उसी की होती है
हार जिसे हौसला देती है
ना थम ना रुक बढ चल
ऊंचाईयां हौले हौले ही मिलती है.

ना डर ना घबरा इसे गले लगा
हार नहीं दुष्मन किसी की
हार तो प्रेरणा है
उसी से विजय की राह मिलती.


आप सरल शब्दों में सीधे सीधे दिल से कह देती हैं.

blue sky said...

sorry i am late...first of all the whole new look of yr blog is lovely..poetry is also a very impressive one..i really liked it. u have linked many things in jus one line , tht is "hoke rahega honhaar", vry touchy.

डॉ० डंडा लखनवी said...

सुश्री डिंपल महेश्वरी जी! आपकी रचना ने मुझे टिप्पणी करने हेतु विवश कर दिया। आपने लिखा है-‘‘परिवर्तन जीवन का नियम है।’’ बौद्ध-दर्शन में इस विषय पर व्यापक रूप से प्रकाश डाला गया है। यही अनित्यवाद है। वहाँ जीवन को ही नहीं संपूर्ण जगत् को परिवर्तनशील बताया गया है। इस सत्य को जिसने आत्मसात कर लिया वह संसार में हो रहे क्षण-प्रतिक्षण के बदलावों के कारण विचलित नहीं होता। यह ज्ञान का मार्ग है। सूर-साहित्य में ‘अक्रूर’ (दयावान) गोपिकाओं को यही संदेश देने गए थे। भक्तिमार्गी गोपिकाओं ने उनकी बात सुनने से इंकार कर दिया था। साहित्य में इस प्रकार का वाद-प्रतिवाद होना स्वभाविक प्रक्रिया है। आपने जाने में अथवा अनजाने में ज्ञानमार्ग के आलोक में अपनी रचना लिखी है। इक्कीसवीं सदी के शिक्षक को ऐसा होना भी चाहिए। इस रचना के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई।

Gourav Agrawal said...

बेहतरीन प्रस्तुती :)

विनोद कुमार पांडेय said...

बढ़िया लिखा है आपने..पहली बार आपका ब्लॉग देखा..अच्छा लगा...शुभकामनाएँ

arun c roy said...

sunder rachna

शशि रंजन said...

एक सच... जिसे मैं बस पढता गया |
सुन्दर अभिव्यक्ति |

पढ़ें
देश के हालात: मिसिर पुराण में
http://humbhojpuriya.blogspot.com/2010/05/blog-post.html

kavisurendradube said...

जीवन यों चलता है
रात भी आती है
सूरज भी निकलता है

naarii said...

बेहतरीन प्रस्तुती ...

Pradeep said...

विचार बहुत अच्छे है.......सकारात्मक बदलाव जरुरी हैं....
पर आपके इन विचारों में एक बात जोड़ना चाहूँगा......
"जो बदल नही सकता....झुक नहीं सकता.....वो धारा के साथ नहीं बह सकता....हमे तो धाराप्रवाह बहाना हैं .."
मेरा ऐसा मानना है की धारा के विपरीत बहाने वाले ही सही मायनों में बदलाव लातें है .......

Anonymous said...

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