Friday, May 7, 2010

एक बेटी on Mother's Day


तू इस जग से है न्यारी........मेरी माँ तू मुझको है प्यारी.......में हु तेरी राजदुलारी ....|


इस दुनिया का सबसे खुबसूरत लफ्ज़ क्या है????अगर कोई मुझसे ये सवाल करे तो मेरा जवाब होगा---माँ.........जरुरी नही की हर कोई इस सवाल का यही जवाब दे|जवाब बहुत सारे हो सकते है....और बहुत अच्छे अच्छे हो सकते है......पर मेरे लिए तो इस दुनिया में सबसे अच्छी और प्यारी मेरी माँ है......इस दुनिया में सबसे खुबसूरत शब्द है माँ......इस दुनिया में सबसे खुबसूरत जगह है मेरी माँ की गोद ....इस दुनिया में सबसे खुबसूरत चीज है मेरी माँ की मुस्कराहट ......मेरी कविताओं का एक अनमोल शीर्षक है मेरी माँ......!!!


एक बेटी के लिए माँ कि क्या एहमियत होती हैं ये सिर्फ एक बेटी ही समझ सकती हैं|

यादों के धुंधले सांएं में
बनी माँ की परछाईं
खाने की वही खुशबू
में रसोई में भागी चली आयी
ध्यान आया सहसा
यह तो स्वप्न हैं
पाऊं तुझे हर कोने में
पर माँ तू कहाँ हैं??
यह मेरे ढूंढने कि
इन्तहा हैं...
माँ तेरी चूल्हे कि रोटी
याद आती हैं..
माँ तेरी परियों सी
बोली याद आती हैं.
तेरे बिना बालों में
कंघी नहीं कर पाती
दिनभर में तेरी रेशमी
साड़ियों को हूँ सहलाती
अकेले में तू जाने क्या
सोचा करती थी
गुमशुम चुपचाप सी
रहा करती थी
ये गुत्थी आज भी
में सुलझा नहीं पायी
लौट के न कभी तू आएगी
ऐसा कहती हैं ताई
क्यों छूटा मुझसे साथ तेरा
में तरस गयी कहाँ प्यार तेरा
वो टोकना वो प्यार से
समझाना तेरा
लड़की हूँ में
ये एहसास दिला कर
मर्यादाएं सिखलाना तेरा
क्यों में तेरे आसुओं का
मर्म न जान पायी
क्यों तेरे दर्द की
गहराई समझ न पायी माँ
लगे कहीं चोट
तो निकले आह
हर आह के साथ
दिल बोले माँ
कब ये काली घटायें बरसे
मेरा रोम रोम
तेरे प्यार को तरसे
माँ आज भी
तेरे प्यार की भूखी हूँ
कलि हूँ तेरे डाली की
पर सूखी हूँ माँ ..|


46 टिप्पणियाँ:

राजेन्द्र मीणा said...

बहत सुन्दर ......माँ पर कुछ भी लिखो कम ही है ..और आपने तो बहुत अच्छा लिखा है....औरत के इसी महान रूप 'माँ' पर हमने भी कुछ लिखने की कोशिश की है ..आपके सुझाव सादर आमंत्रित है ....
http://athaah.blogspot.com/2010/05/blog-post_4890.html

nilesh mathur said...

माँ पर तो जितना लिखा जाता है, अच्छा ही होता है, पढ़ते पढ़ते आँखें नम हो गयी, बेहतरीन रचना!

हर्षिता said...

इस धरा पर मां ईश्वर की प्रतिनिधि है,क्या कहूं शब्द कम पढ़ जाते हैं।मां से दर्द का रिश्ता है।

vinodbissa said...

यादों के धुंधले सांएं में
बनी माँ की परछाईं
खाने की वही खुशबू
में रसोई में भागी चली आयी
ध्यान आया सहसा
यह तो स्वप्न हैं
पाऊं तुझे हर कोने में
पर माँ तू कहाँ हैं??
यह मेरे ढूंढने कि
इन्तहा हैं...
अहसासों का बहुत अच्छा संयोजन है ॰॰॰॰॰॰ दिल को छूती हैं पंक्तियां ॰॰॰॰ आपकी रचना की तारीफ को शब्दों के धागों में पिरोना मेरे लिये संभव नहीं ॰॰॰ डिंपल जी आप खूब तरक्की करें ॰॰॰॰ शुभकामनायें

JHAROKHA said...

dbissa said...
यादों के धुंधले सांएं में
बनी माँ की परछाईं
खाने की वही खुशबू
में रसोई में भागी चली आयी
ध्यान आया सहसा
यह तो स्वप्न हैं
पाऊं तुझे हर कोने में
पर माँ तू कहाँ हैं??
यह मेरे ढूंढने कि
इन्तहा हैं...
pure sansar me is nischhal rissssssshte ke aage to devata bhi nat-mastak hain.
bahut hi bhauk kar gai aapki ye post .
poonam

JHAROKHA said...

bahuthi bhauk kar gai aapki yah rachna.sach much maa jaisi duniya me hai koi kaha?
यादों के धुंधले सांएं में
बनी माँ की परछाईं
खाने की वही खुशबू
में रसोई में भागी चली आयी
ध्यान आया सहसा
यह तो स्वप्न हैं
पाऊं तुझे हर कोने में
पर माँ तू कहाँ हैं??
यह मेरे ढूंढने कि
इन्तहा हैं...-------------poonam

संजय भास्कर said...

बहत सुन्दर ......माँ पर कुछ भी लिखो कम ही है

संजय भास्कर said...

maa par likhi gayi kavita...dil ko chu gayi!bahut accha laga padhkar..

zeal said...

.
Very touching !

I felt as if you voiced my thoughts .

आशीष/ ASHISH said...

भावपूर्ण रचना...
इश्वर सब जगह नहीं हो सकता था, इसलिए उसने मा बनाई!

कविता रावत said...

यादों के धुंधले सांएं में
बनी माँ की परछाईं
खाने की वही खुशबू
में रसोई में भागी चली आयी
ध्यान आया सहसा
यह तो स्वप्न हैं
पाऊं तुझे हर कोने में
पर माँ तू कहाँ हैं??
.. Maa ke mamtamaye chawan ka sundar chitran...
Mother Day kee aapko bahut-bahut shubhkamnayne....

फ़िरदौस ख़ान said...

Very touching...

Happy Mother's Day...

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

आपकी इस रचना पर क्या कहूँ ... बस इतना कहता हूँ कि आँखें नाम हो गई इसे पढते पढते ...
मेरे ब्लॉग पर आप आये और मेरी रचना को पसंद किये ... इसके लिए धन्यवाद !

मनोज कुमार said...

इस धरा पर मां ईश्वर की प्रतिनिधि है, कितना भी कहें शब्द कम पढ़ जाते हैं। मदर्स डे को समर्पित इस कविता की भावनाओं की गहराई एवं मां को नमन!

अजनबी said...

superrrrrrrrrrb

अजनबी said...

बहत सुन्दर ....आँखें नम हो गयी, HAPPY MOTHERS DAY

अजनबी said...

मां का मौन भी शिक्षा देता गलत राह से हटा देता
मां को शब्दों में बांधू ऐसा नहीं कोई शब्द मिलता .

अजनबी said...

माँ भूलती नहीं,
याद रखती है हर टूटा सपना।
नहीं चाहती कि
उसकी बेटी को भी पड़े
उसी की तरह
आग में तपना।
माँ जानती है
जिन्दगी kee बगिया में
फूल कम - शूल अधिक हैं,
उसे यह भी ज्ञात है कि
समय सदा साथ नहीं देता।
वह अपनी राजदुलारी को
रखना चाहती है महफूज़
नहीं चाहती कि
उस जान से ज्यादा
अज़ीज़ बेटी पर
कभी भी उठे उँगली।
इसलिए वह
भीतर से
नर्म hote hue भी
ऊपर से
दिखती है कठोर।
जैसे raat की सियाही
छिपाए रहती है
अपने दामन में
उजली भोर।

चेतना के स्वर said...

aapke charnon me sadar vandan
bahut hi ghazab ka likh hai. ab aapki to tareef jitni kro utni kam hai naam hi aisa hai.
khair meri badhai sweekar karen
or
is post par click karke dhang ki lage to comment karen
yug-yug se tuchcha
eklavya

Rocking rathi said...

HAPPY MOTHERS DAY DIIIIII

Rajat Ghildiyal said...

" माँ " के प्रति प्रेम एक सहज भाव है लेकिन इस प्रेम को लेखनी के सहारे उजागर करना अत्यंत कठिन होता है , आपने जो भाव लिखे हैं उनमे सचाई और आपकी , "माँ" के प्रति अपार श्रधा झलकती है . इसे "लेख" नहीं कह सकता क्यूंकि ये केवल शब्द नहीं वरन "भाव" हैं . सो लेख से कहीं उपर हैं . बहुत सुन्दर. इश्वर आपको अपार सफलता दे .

SABD Just Adorable said...

Ek ahsaas ka pratibibm ha tumari kavita
Ma ka ahsaas akaas ki unchaiyo se bhi uncha ha
tmhari abhiwaqkti unti hi unchaiyo ko chu rahi ha

रोहित said...

behad sundar rachna!!!!!!!

rohit said...

Very heart touching and genuine poetry........it made my heart filled with childhood emotions....I really felt this poem...thanks for such a nice thought.

Anonymous said...

Mother the biggest gift of Allah to us
Mother the candle burn herself to light our life
Mother the other name of kindness
Mother who hold us nine month and suffer
Mother who feed us from her blood and milk
Mother stays sleepless all the nights holding us
Mother teach us how to walk and talk
Mother guides us and secures us
Mother loves us from start to end
Mother is mother no one can take her place

दिगम्बर नासवा said...

वाह ... सच है माँ की अहमियत ..... कमाल का लिखा है ... लाजवाब ...

Dhirendra Giri said...

wah kya baat hai mitra aapnki rachna ne dil ko chhu liya

Shah Nawaz said...

सच कहा है किसी ने कि माँ के पैरों तले जन्नत है. बहुत ही ख़ूबसूरती से आपने माँ के प्यार भरे आँचल की दास्ताँ बयां की है. बहुत ही अच्छी रचना है!

pradeep said...

MAA-sabhi rishto ki shuruwat duniya ke is sabse khubsoorat lafj MAA se hoti hai..duniya ki har ek vastu adhuri hai MAA ke bina,,sab kuch mil jaye par na mile MAA ka pyar to hai sab kuch adhura..ye aparibhashit hai....kisi shayar ne kaha hai-pahle gaay ko maa ka rarja dete the aur abhi bhi dete hai..lekin ab MAA ko hi gaay samjhne lage hai....MAA ke bina to is sansar ka koi astivtv hi nahi hai...
pari ji aapne ye jo itni sundar aur marmik kavita likhi hai..bahut hi achhi hai kavita hai...dil ko chhu lene wali kavita hai...

राजीव कुमार कुलश्रेष्ठ said...

सुन्दर शब्दों की बेहतरीन शैली
भावाव्यक्ति का अनूठा अन्दाज
बेहतरीन एवं प्रशंसनीय प्रस्तुति
हिन्दी को ऐसे ही सृजन की उम्मीद
धन्यवाद....साधुवाद..साधुवाद
satguru-satykikhoj.blogspot.com

Shekhar Suman said...

maa....
kya kahoon???
yeh shabd hi apne aap mein warnan hai.........
yun hi likhte rahein...
-----------------------------------
mere blog mein is baar...
जाने क्यूँ उदास है मन....
jaroora aayein
regards
http://i555.blogspot.com/aur

Virendra Singh Chauhan said...

Very good. ? Really nobody is like our mother.Great piece of Writing.

REENA said...

बहुत ही अच्छी रचना है!R

अरुणेश मिश्र said...

अति सुन्दर रचना डिम्पल जी ।

naarii said...

बेहतरीन प्रस्तुती ...

naarii said...

यादों के धुंधले सांएं में
बनी माँ की परछाईं
खाने की वही खुशबू
में रसोई में भागी चली आयी

हुत अच्छा संयोजन है ॰

naarii said...

सारी रचनाये आपकी बहुत ही अच्छी है/
जितना भी कहू बहुत कम है|

Shri"helping nature" said...

आपकी रचनाओं में जादू है |
डिम्पल जी आपके लिए शब्द नहीं है |
आप की वो कविता मुझे सबसे ज्यादा पसंद है | वो है,
चाहे बुराई रावण समान
राम आएगा धर के कमान
चाहे अधम बड़ा ताकतवर
होके रहेगा होनहार
आप सुंदर लिखती है इस कविता के लिए आपकी जितनी तारीफ करूँ कम है ..............
धन्यवाद इस कविता के लिए आप की ये कविता मै हमेशा गुनगुनाता हूँ |

Shri"helping nature" said...

आपकी रचनाओं में जादू है |
डिम्पल जी आपके लिए शब्द नहीं है |
आप की वो कविता मुझे सबसे ज्यादा पसंद है | वो है,
चाहे बुराई रावण समान
राम आएगा धर के कमान
चाहे अधम बड़ा ताकतवर
होके रहेगा होनहार
आप सुंदर लिखती है इस कविता के लिए आपकी जितनी तारीफ करूँ कम है ..............
धन्यवाद इस कविता के लिए आप की ये कविता मै हमेशा गुनगुनाता हूँ |

arpit said...

bahut khubsurat rachna

http://bejubankalam.blogspot.com/

Suman said...

nice

फ़िरदौस ख़ान said...

बेहतरीन...

Prarthana gupta said...

bahut sunder abhiwyakti....

janab said...

वाह डिम्पल जी....बहुत उम्दा
आपने तो आँखों में आंसू ला दिए....

Pradeep said...

ह्रदय द्रवित हो गया.....

Neel Shukla said...

This is an untouchable moments.......value you have shown us...
बहत सुन्दर ......

We can be a chain to start loving our head..........elders.........

Nice way to motivate our wave